भारतीय संगीत में पांच मुख्य रूप से प्रयोग होने वाले संगीत वाद्य यंत्र-
संगीत कि परिभाषा के अनुसार- गायन, वादन और नृत्य इन तीनों कलाओं के मेल को संगीत कहते है।
गायन के लिए वाद्य यंत्र भी आव्श्यक होता है, क्योंकि सिगंर को मीटर में नापने का काम वाद्य यंत्र करते है, इसलिए वाद्य यंत्र संगीत का महत्वपूर्ण भाग है।
बात करते है पांच प्रमुख रूप से प्रयोग होने वाले वाद्य यंत्र जो कि संगीत में अहम भूमिका निभाते है, जिसके बिना संगीत कही न कहीं अधूरा सा लगता है।
1) ढ़ोलक / तबला / OCTA - PAD
संगीत कि परिभाषा के अनुसार- गायन, वादन और नृत्य इन तीनों कलाओं के मेल को संगीत कहते है।
गायन के लिए वाद्य यंत्र भी आव्श्यक होता है, क्योंकि सिगंर को मीटर में नापने का काम वाद्य यंत्र करते है, इसलिए वाद्य यंत्र संगीत का महत्वपूर्ण भाग है।
बात करते है पांच प्रमुख रूप से प्रयोग होने वाले वाद्य यंत्र जो कि संगीत में अहम भूमिका निभाते है, जिसके बिना संगीत कही न कहीं अधूरा सा लगता है।
1) ढ़ोलक / तबला / OCTA - PAD
2) हारमोनियम / KEYBOARD
3) गिटार
4) बांसुरी
5) मंजीरा / घंटी / चिमटा / घुंघरू आदि

विशेषता -
उपरोक्त वाद्य यंत्रो के संगीत सभा में होने से संगीत में रंग आ जाता है। वैसे बात करें तो आज अनेक प्रकार के वाद्य यंत्र उपलब्ध है। जिसके लिए आपको अधिक परिश्रम करने की जरूरत भी नहीं है, लेकिन उपरोक्त बताये गये वाद्य यंत्र ऐसे है जो कि अपना अलग ही महत्व रखते है। जैसे – 1) ढोलक – ताल के लिए उपयोग किया जाता है अति आवश्यक है, 2) हारमोनियम – सुर के लिए आवश्यक है, 3) गिटार – सुर और ताल दोनो का प्रयोग किया जा सकता है, म्युजिक बनाने में प्रयोग किया जाता है, 4) बांसुरी – सबसे अनोखा वाद्य यंत्र संगीत में मधुरता लाने के लिए प्रयोग किया जाता है, 5) मंजीरा / घंटी / चिमटा / घुंघरू आदि – हाथ से बाजाने के लिए प्रयोग किया जाता है माहोल बनाने के लिए।
।। इन्सान होना भाग्य की बात है और संगीतकार होना सौभाग्य की बात है।।
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