Shekhar Music Academy: Sangeet
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संगीत- गायन, वादन, सुर, लय, ताल, थाट, राग, सरगम, पकड़, आलाप, बंदिश, सरगम गीत, INDIAN & WESTERN PATTERNS

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18 January 2022

संगीत परिचय - गत किसे कहते है | मसीतखानी और रजाखानी गत में क्या अंतर है | DEFINATION MASITKHANI AND RAJAKHANI GAT






गत किसे कहते हैं ?

गत किसे कहते हैं ? गत का मतलब – विभिन्न प्रकार के वाद्यों पर बजायी जाने वाली ताल में बंधी हुई रचनाएँ गत कहकर पुकारी जाती हैं । गत के प्रत्येक स्वर पर मिजराब के बोल होते हैं ।

जैसे – गग रे सासा नि रे ग ग ग दिर दा दिर दा रा दा दा रा


गत के प्रकार:

Types of Gat in Music ? गत के कितने प्रकार हैं ? – मुख्य रूप से गत दो प्रकार की होती हैं :-

1. मसीतखानी गत किसे कहते हैं ?

1. मसीतखानी गत मसीतखानी गत की वंश परम्परा के द्वारा इस नवीन गत का आविष्कार हुआ । इस गत का नामकरण इसके आविष्कारक के आधार पर हुआ , जिनका नाम मसीत खाँ था । मसीत खाँ के पिता का नाम फिरोज खाँ था । कुछ विद्वानों द्वारा इसे ‘ फिरोजखानी गत ‘ के नाम से भी जाना जाता है ।

• ये गते विलम्बित लय प्रधान होती हैं तथा खाली की तीन मात्राओं के पश्चात् बारहवीं मात्रा से शुरू हो जाती हैं । इसके बोल दिर दा दिर दा रा दा दा रा , दिर दा दिर दारा दा दा रा होते हैं । मसीतखानी गत हेतु मुखड़ा 5 मात्राओं में होना अति आवश्यक होता है । 12 वीं मात्रा से बन्दिश प्रारम्भ की जाती हैं ।


2. रजाखानी गत किसे कहते हैं ?

मसीतखानी गत विलम्बित लय प्रधान होती है और रजाखानी गत द्रुत लय में बजाई जाती है । .

• लय के अनुसार , ‘ रजाखानी गत ‘ मसीतखानी के बिल्कुल विपरीत होती है । इसकी प्रकृति गम्भीर न होकर चंचल होती है । वादक को इस गत में पूर्णरूपेण स्वतन्त्रता प्राप्त होती है , वह अपनी इच्छा के अनुसार तान व तोड़े बजाने की पूर्ण स्वतन्त्रता रखता है । रजाखानी गत के बोल इस प्रकार होते हैं 
– दिर दिर दाऽर दाउर दा , आदि ।

– पूर्णरूपेण स्वतन्त्रता प्राप्त होने के कारण वादक द्वारा इसमें अपनी पूरी तैयारी दिखाने का अवसर प्राप्त होता है ।

– जिस प्रकार मसीतखानी गत को ‘ पश्चिमी बाज ‘ कहा जाता है , उसी प्रकार , रजाखानी गत को ‘ पूर्वी बाज ‘ के नाम से जाना जाता है ।

– इसके आविष्कारक के रूप में रजा खाँ साहब का नाम लिया जाता है , इसमें निश्चित बोलों का नहीं , अपितु आवश्यकतानुसार विभिन्न बोलों का प्रयोग किया जाता है । इसमें तैयारी के साथ तोड़े बजाए जाते हैं और अन्त में झाला के विभिन्न प्रकार बजाकर गत को समाप्त किया जाता है । अत : इसे ‘ लखनऊ बाज ‘ के नाम से भी जाना जाता है।





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01 April 2021

संगीत - राग में गाना बजाना क्यों जरूरी होता है | RAAG ARE THE USEFUL FOR SANGEET WHY? राग क्या होता है जानिए

संगीत - राग में गाना बजाना क्यों जरुरी होता है –

इस प्रश्न का उत्तर जानने के लिए आपको सबसे पहले ये जानना आवश्यक है कि राग क्या होता है। अर्थात् राग कैसे बनता है, उसके बाद आपके लिए यह जानना जरूरी नही होगा कि राग में गाना बजाना क्यों आवश्यक है, क्योंकि संगीत में राग का विशेष महत्व है।

राग प्रयः किसी गाने को अधिक सुंदर बनाने के लिए लय बद्ध किया जाने वाला माध्यम होता है जिसके अंतर्गत हि गाने को गाया बजाया जाता है, और प्रत्येक राग के लिए अपना एक अलग ही सुर होता है। जो कि एक पहचान होता है कि ये कौन सा राग है, जानने के लिए राग का अपना सुर होता है। जिसके द्वारा यह पता चलता है कि गाना कौन से राग का गाना है।

यदि आप कोई भी संगीत वाद्य यंत्र बजाते है तो यह आपके लिए यह विशेष महत्वपूर्ण विषय है कि आपको राग की जानकारी होनी चाहिए।
उदाहरण - जैसे ट्रेन को अगर पटरी से अलग कर दिया जाए तो ट्रेन नही चल सकती है उसी प्रकार यदि संगीत में से राग को हटा दिया जाय तो संगीत बेसुरा हो जाएगा ।

यह है राग का महत्म हमारे संगीत जगत में तो दोस्तो संगीत के बारे में और अधिक जानने के लिए हमारे साथ जुडे रहें। और कमेंट बाक्स में जरुर बताएँ। 

।। धन्यवाद ।।






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25 March 2021

HOW MANY RAAG'S ARE THERE IN SANGEET | INDIAN CLASSICAL MUSIC | राग कितने होते है | SHEKHAR TRICKY MUSIC

 LIST OF ALL RAAG IN INDIAN CLASSICAL MUSIC

भारतीय संगीत में कुल कितने राग होते है ? यह एक अत्यंत ही कठिन सवाल है जिसका उत्तर प्रायः किसी को नही पता है। क्योंकि संगीत जितना बडा है उतना ही गहरा भी है जिसको नापा नही जा सकता है। अर्थात यह एक ऐसा समुद्र है जिसका एक बूंद भी मिल जाए तो समझिए कि बहुत है।

चलिए राग से पहले थाट से परिचय करते है कि भारतीय संगीत में कुल कितने थाट होते है - जिसका उत्तर देना प्रायः सरल है क्योंकि हमारे भारतीय संगीत में मुख्यतः 10 थाट है जो निम्न है -

1. कल्याण ठाट
2. बिलावल ठाट
3. खमाज ठाट
4. काफी ठाट
5. पूर्वी ठाट
6. मारवा ठाट
7. भैरव ठाट
8. भैरवी ठाट
9. आसावरी ठाट
10. तोड़ी ठाट

प्रत्येक थाट में लगभग 484 राग होते है जो कि निम्नतः अवर्णनीय है।




रागो की संख्या लगभग -

 

    1. अंजनी टोड़ी 
    2. अम्बिका 
    3. अरज 
    4. अरुण मल्लार 
    5. अलंक गुर्जरी 
    6. आड़ाना 
    7. आड़ाना कानाड़ा 
    8. आनन्द भैरब 
    9. आनन्द-भैरबी 
    10. आनन्दीकल्याण 
    11. आभाबती 
    12. आभीरी 
    13. आभोगी कानाड़ा 
    14. आलाहिया 
    15. आलाहिया-बिलाबल 
    16. आशा 
    17. आशाटोड़ी 
    18. आशाबरी 
    19. आहीर भैरब 
    20. आहीर ललित 
    21. आहीरा टोड़ी 
    22. आहीरी 
    23. इमन 
    24. इमन कल्याण 
    25. इमनि बिलाबल 
    26. उत्तरी गुणकेली 
    27. कुकुभ बिलाबल 
    28. कुकुभा 
    29. कनकधानी 
    30. कमलंजनी 
    31. कुमारी 
    32. कर्णाट 
    33. कल्याण 
    34. कल्याण-नट 
    35. कलाबती 
    36. कलाश्री 
    37. कलिंगड़ा 
    38. काफि 
    39. काफि-कानाड़ा 
    40. काफि-टोड़ी 
    41. कामोद 
    42. कामोद नट 
    43. केदारा 
    44. केदारा-नट 
    45. कोमल आशाबरी 
    46. कोमल देशी 
    47. कोमल देशी 
    48. कोमल बागेश्री 
    49. कोहल कानाड़ा 
    50. कौमारी 
    51. कौशिक ध्बनि 
    52. कौशिक रंजनी 
    53. कौशिकी कानाड़ा 
    54. कौशी 
    55. कौशी भैरब 
    56. कौशी भैरबी 
    57. खट 
    58. खाम्बाज 
    59. खाम्बाबती 
    60. खोकर 
    61. गुणकेली 
    62. गुर्जरी 
    63. गुर्जरी टोड़ी 
    64. गाओति 
    65. गान्धारी 
    66. गारा 
    67. गारा कानाड़ा 
    68. गोँड़ 
    69. गोँड़ मल्लार 
    70. गोँड़मल्लार 
    71. गोपी बसन्त 
    72. गोरख कल्याण 
    73. गौड़मल्लार 
    74. गौड़सारंग 
    75. गौरांजनी 
    76. गौरी 
    77. गौरी टोड़ी 
    78. चक्रधर 
    79. चन्द्रकल्याण 
    80. चन्द्रकान्त 
    81. चन्द्रकोष 
    82. चन्द्रिका 
    83. चम्पक 
    84. चम्पाकलि 
    85. चर्जु कि मल्लार 
    86. चित्रागौरी 
    87. छाया 
    88. छायाटोड़ी 
    89. छायानट 
    90. जंला 
    91. जय कंस 
    92. जयजय बिलाबल 
    93. जयजयन्ती 
    94. जयबन्ती 
    95. जयराज 
    96. जयश्री 
    97. जयेत् 
    98. जयेत् मल्लार 
    99. जयेत्कल्याण 
    100. जयेतश्री 
    101. जलधर केदारा 
    102. जाजमल्लार 
    103. जिल्‌हा 
    104. जैत् 
    105. जैत् कल्याण 
    106. जौनपुरी 
    107. झिँझिट 
    108. झिलफ 
    109. टंक-कानाड़ा 
    110. टंकश्री 
    111. टंकी 
    112. टोड़ी 
    113. त्रिबेणी 
    114. तिलं 
    115. तिलककामोद 
    116. दुर्गा 
    117. दुर्गा कल्याण 
    118. दरबारी 
    119. दरबारी टोड़ी 
    120. दरबारी-कानाड़ा 
    121. दीपक 
    122. देबगान्धार 
    123. देबगिरि 
    124. देबगिरि बिलाबल 
    125. देबरंजनी 
    126. देबशाख 
    127. देश 
    128. देश गौड़ 
    129. देशकार 
    130. देशाख्य 
    131. देशी 
    132. देशीटोड़ी 
    133. धनाश्री 
    134. धबलाश्री 
    135. धुरिया मल्लार 
    136. धानश्री 
    137. धानश्री 
    138. धानी 
    139. नट 
    140. नट बिहाग 
    141. नट भैरब 
    142. नटनारायणी 
    143. नट-बिलाबल 
    144. नटमल्लार 
    145. नन्द 
    146. नागध्बनि कानाड़ा 
    147. नागस्बराबली 
    148. नाचाड़ी टोड़ी 
    149. नाट 
    150. नाट कुरंजिका 
    151. नायकी कानाड़ा 
    152. नारायण-बिलाबल 
    153. नारायणी 
    154. निशाशाख 
    155. नीलाम्बरी 
    156. पंचम 
    157. पटदीप 
    158. पटदीपकी 
    159. पटबिहाग 
    160. पटमंजरी 
    161. परज 
    162. परजबाहार 
    163. प्रताप बराली 
    164. प्रदीपकी 
    165. पूर्ब कल्याण 
    166. पूर्बकल्याण 
    167. पूर्ब्या 
    168. पूरबी 
    169. पूर्बी सारं 
    170. प्रभात 
    171. प्रभात भैरब 
    172. प्रभात-भैरब 
    173. प्रभाबती 
    174. पूरिया 
    175. पूरिया कल्याण 
    176. पूरिया धानश्री 
    177. पलासी 
    178. पुष्प रंजनी 
    179. पाहाड़ी 
    180. पिलु 
    181. फिरोजखानी टोड़ी 
    182. बंगाल बिलाबल 
    183. बंगाल-भैरब 
    184. बंगाली 
    185. बड़हंस 
    186. बड़हंस सारं 
    187. बृन्दाबनी सारं 
    188. बरबा 
    189. बराटी 
    190. बरारी 
    191. बसन्त 
    192. बसन्त बाहार 
    193. बसन्त मुखारी 
    194. बृहन्नट 
    195. बागेश्री 
    196. बागेश्रीबाहार 
    197. बारोँया 
    198. बाहादुरी टोड़ी 
    199. बाहार 
    200. बिचित्रा 
    201. बिजय 
    202. बिजय कोष 
    203. बिभास 
    204. बिलाबल 
    205. बिलासखानी टोड़ी 
    206. बिहगरा 
    207. बिहारी 
    208. बेहाग 
    209. बेहाग नट 
    210. बैजयन्ती 
    211. बैरागी भैरबी 
    212. भंखार 
    213. भूपालटोड़ी 
    214. भूपाली 
    215. भबशाख 
    216. भबानी 
    217. भाटियार 
    218. भिन्नषड़ज 
    219. भीम 
    220. भीमपलश्री 
    221. भैरब 
    222. भैरब-बाहार 
    223. भैरबी 
    224. भौपाल 
    225. मुखारी 
    226. मंगल 
    227. मंगल कानाड़ा 
    228. मंगल भैरब 
    229. मंजरी 
    230. मदमात सारं 
    231. मुद्राकी कानाड़ा 
    232. मुद्राकी टोड़ी 
    233. मधुकंस 
    234. मधुकोष 
    235. मधुमन्ती 
    236. मधुमाधबीसारं 
    237. मधुरंजनी 
    238. मनोहर 
    239. मूलतान 
    240. मल्लार 
    241. मलुहा 
    242. माझ 
    243. माड़ 
    244. माढ़ 
    245. मान्ड 
    246. मारु बेहाग 
    247. मार्गहिन्दोल 
    248. मारुबेहाग 
    249. मारोया 
    250. मालकौश 
    251. मालगुंज 
    252. मालबी 
    253. मालश्री 
    254. मालुहा केदार 
    255. मालाराणी 
    256. मालीगौरा 
    257. मालीन 
    258. मियाँ सारं 
    259. मियाकी कानाड़ा 
    260. मियाँकी टोड़ी 
    261. मियाँकी सारं 
    262. मियाँमल्लार 
    263. मीरा सारं 
    264. मीराबाई कि मल्लार 
    265. मेघ 
    266. मेघमल्लार 
    267. मेघरंजनी 
    268. मोटकी 
    269. यशरंजनी 
    270. योग 
    271. योग 
    272. योग कोष 
    273. योग-आशाबरी 
    274. योगबर्ण 
    275. योगिया 
    276. रक्तहंस सारं 
    277. रत्नद्बीप 
    278. रस रंजनी 
    279. रसचन्द्र 
    280. रागेश्री 
    281. राज बिजय 
    282. राजकल्याण 
    283. राजेश्बरी 
    284. रामकेली 
    285. रामदासी मल्लार 
    286. रेबती 
    287. रेबती कानाड़ा 
    288. रेबा 
    289. लक्ष्मी कल्याण 
    290. लक्ष्मीटोड़ी 
    291. लंकादाहन सारं 
    292. लच्छाशाख 
    293. लच्छासार 
    294. लुम 
    295. ललित 
    296. ललित पंचम 
    297. ललित मंगल 
    298. ललितकेली 
    299. ललिता गौरी 
    300. लाचारीटोड़ी 
    301. लाजबन्ती 
    302. शुक्लबिलाबल 
    303. शंकरा 
    304. शंकराभरण 
    305. शुद्ध कल्याण 
    306. शुद्ध बिलाबल 
    307. शुद्ध मल्लार 
    308. शुद्ध सारं 
    309. श्याम 
    310. श्याम कानाड़ा 
    311. श्यामकल्याण 
    312. श्यामकेदार 
    313. शरत् 
    314. श्री 
    315. श्रीकल्याण 
    316. श्रीकल्याण 
    317. श्रीटंक 
    318. श्रीबन्ती 
    319. श्रीरंजनी 
    320. शाहाना कानाड़ा 
    321. शिबमत भैरब 
    322. शिबरंजनी 
    323. शिबराज 
    324. शोभाबरी 
    325. षड़ 
    326. सुघराइ 
    327. सुघराइ कानाड़ा 
    328. सुघराइ टोड़ी 
    329. सुरट 
    330. सुरदासीमल्लार 
    331. सरफर्दा 
    332. सरफर्दा बिलाबल 
    333. सुरमल्लार 
    334. सरस्बती 
    335. सरस्बतीरंजनी 
    336. सुहा 
    337. सुहा कानाड़ा 
    338. सुहाटोड़ी 
    339. साजगिरि 
    340. साजन 
    341. साँझ हिन्दोल 
    342. साबनी कल्याण 
    343. साबेरी 
    344. सामन्त सारं 
    345. साहाना 
    346. साहाना कानाड़ा 
    347. साहिनी 
    348. सिन्धु 
    349. सिन्धुड़ा 
    350. सिन्धु-भैरबी 
    351. सौराष्ट्र 
    352. सौराष्ट्र टंक 
    353. हंस कंकलि 
    354. हंस नारायण 
    355. हंस मंजरी 
    356. हंसध्बनि 
    357. हंसश्री 
    358. हाम्बीर 
    359. हिजाज 
    360. हिन्दोल 
    361. हिन्दोल बाहार 
    362. हिन्दोली 
    363. हिम 
    364. हेमकल्याण 
    365. हेमन्त 
    366. हेमबन्ती 
    367. होसेनी कानाड़ा


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