राग - दरबारी - Details, आरोह - अवरोह , पकड़ , आलाप और बंदिश, On Keyboard - Harmonium - Shekhar Music Academy
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संगीत- गायन, वादन, सुर, लय, ताल, थाट, राग, सरगम, पकड़, आलाप, बंदिश, सरगम गीत, INDIAN & WESTERN PATTERNS

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24 September 2020

राग - दरबारी - Details, आरोह - अवरोह , पकड़ , आलाप और बंदिश, On Keyboard - Harmonium

 


राग - दरबारी


स्वर : गंधार, धैवत व निषाद कोमल। शेष शुद्ध स्वर।
आरोह : स, रे, ग_, म, प, ध_, नि_, सं
अवरोह : सं, नि_, ध_, प, म, ग_, रे, स
पकड़ :  
सा, रे, गा, रे, सा, धा, नि, रे, सा
(स रे ग_ स रे स ध_ नि_ रे स)
जाति : सम्पूर्ण - सम्पूर्ण वक्र
थाट : आसावरी
वादी : 
रिषभ (रे)
संवादी : पंचम (प)
समय : रात्रि का तीसरा प्रहर
विश्रांति स्थान : सा; रे; प; - सा'; प; रे;
मुख्य अंग : सा रे ग१ (रे)ग१ ; म प ध१ (प)ध१ नि१ प ; नि१ म प सा' ; सा' (नि१)ध१ नि१ प ; म प (म)ग१ म रे सा ; ,ध१ ,नि१ सा;

विशेष - राग दरबारी कान्हडा, तानसेन द्वारा बनाया हुआ राग है, यह धारणा प्रचिलित है। यह राग शांत और गम्भीर वातावरण पैदा करता है। इस राग में गंधार और धैवत पर आंदोलन किया जाता है। आरोह में गंधार को रिषभ का कण लगाकर और धैवत को पंचम का कण लगाकर लिया जाता है। इसी तरह अवरोह में गंधार को मध्यम का कण लगाकर और धैवत को निषाद का कण लगाकर लिया जाता है।
धैवत को अवरोह में छोड़ा जाता है जैसे - सा' (नि१)ध१ नि१ प। यह गमक और मींड प्रधान राग है। इस राग का विस्तार मन्द्र और मध्य सप्तक में किया जाता है। यह स्वर संगतियाँ राग दरबारी कान्हडा का रूप दर्शाती हैं -

,नि१ सा रे ; रे सा ; ,नि१ सा रे सा ; सा सा रे रे सा ,नि१ सा ; (,नि१) ,ध१ ; ,नि१ ,ध१ ,नि१ सा ; ,नि१ ,नि१ सा ; ,नि१ ,नि१ रे ; रे ग१ (रे)ग१ ; ग१ म प ; (म)ग१ म रे सा ; रे ,नि१ सा ; (,नि१),ध१ (,नि१),ध१ ,नि१ ,नि१ सा ; ,ध१ ,नि१ रे सा ; म प ध१ (प)ध१ नि१ ; ध१ नि१ सा' ; सा' (नि१)ध१ नि१ प ; म प ; नि१ नि१ प म प ; म प ; (म)ग१ ग१ म रे सा ;

आलाप : स नि़_सरेनि़_ध़_ ध़_नि़_रे ध_पग_रेस

बंदिश :
स.....रे स नि़_ स रे
स रे म ग_
स ग_ स नि़_ ध़_ नि़_ रे स
प......म प नि_ ध_ नि_
रें सं


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............THE END............


1 comment:

  1. please keep it up sir we are proude of your music contents thanks for helping

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