Who is the innovator of Deepak Raag in classical Indian music | राग दीपक का महत्व समझिये | राग दीपक की उत्पत्ति कैसे हुआ Harmonium | Keyboard - Shekhar Music Academy
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14 October 2020

Who is the innovator of Deepak Raag in classical Indian music | राग दीपक का महत्व समझिये | राग दीपक की उत्पत्ति कैसे हुआ Harmonium | Keyboard



राग दीपक के बारे में पूछे जाने वाले प्रश्न -

दीपक राग गाने से क्या सच में दीपक जल जाते थे ?

राग दीपक, खोज करता किसे माना जाता है ?
राग दीपक इतना प्रसिद्ध क्यों हुआ ?
राग दीपक कोनसे थाट का राग है ?
जानिए राग दीपक के बारे में ?

राग दीपक की विशेषताएं -

दीपक राग भारतीय संस्कृति में प्रचलित विभिन्न संगीत शैलियों में से एक राग शैली है। बादशाह अकबर की जिद पर तानसेन ने दीपक राग गया तो न सिर्फ दीपक अपने आप जल उठे, बल्कि आसपास का माहौल भी तपने लगा। इस राग के असर से खुद तानसेन का शरीर भी भयानक रूप से गर्म होने लगा। उनकी बेटियों ने राग मेघ मल्हार गाकर उस वक्त उनके जीवन की रक्षा की, लेकिन 80 साल के बुजुर्ग तानसेन उसके बाद कभी पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो सके, आखिरकार वही ज्वर फिर उभरा और 83 साल की उम्र में उनकी मृत्यु हो गई। संगीत सम्राट तानसेन की स्मृति में हर साल मनाया जाने वाला संगीत समारोह 23 दिसंबर से ग्वालियर में शुरू हो गया है।



अकबर और तानसेन - 
को तानसेन अपने उत्कर्ष पर पहुंचे तो अकबर के नवरत्नों में शामिल कर लिए गए। बादशाह अकबर तानसेन के संगीत के ऐसा मुरीद हुए कि उनकी हर बात मानने लगे। बादशाह पर तानसेन का ऐसा प्रभाव देख कर दूसरे दरबारी गायक जलने लगे। एक दिन जलने वालों ने तानसेन के विनाश की योजना बना डाली। इन सबने बादशाह अकबर से तानसेन से 'दीपक' राग गवाए जाने की प्रार्थना की। अकबर को बताया गया कि इस राग को तानसेन के अलावा और कोई ठीक-ठीक नहीं गा सकता। बादशाह राज़ी हो गए, और तानसेन को दीपक राग गाने की आज्ञा दी। तानसेन ने इस राग का अनिष्टकारक परिणाम बताए गाने से मना किया, फिर भी अकबर का राजहठ नहीं टला, और तानसेन को दीपक राग गाना ही पड़ा।


संगीत-शास्त्रानुसार -
दीपक राग भगवान शंकर के पूर्व-मुख से उत्पन्न हुआ है। जब यह राग गान्धार ग्राम में गाया जाता है, तो विशेष प्रभावोत्पादक सिद्ध होता है। इसका वर्ण लाल तथा सूर्य और अग्नि इसके देवता है। इस राग के प्रभाव से गायक का शरीर जलकर भस्मीभूत हो जाता है।

What is the Deepak Raag?
Raag Deepak is one of the six primal ragas of Indian Classical Music. It is believed to be created by Lord Shiva and there is a myth that singing it creates fire. There are 5 types of Raag Deepak. One belongs to Poorvi Thaat, second to Bilawal Thaat, third to Kalyan Thaat, fourth to Kafi Thaat and fifth to Khaamaj Thaat. Apart from that, there is another raag in Kalyan Thaat whose name is Raag Deepak Kedar. So taking it in the list, there are 6 types of Raag Deepak. Although this raag is nearly extinct, I can provide the details of the first two types and partial details about the rest.

थोड़ी जानकारी राग दीपक के बारे में-
राग दीपक के बारे में ये कहानी प्रसिद्ध है कि इसे जब तानसेन ने गाया था, और उनके शरीर में आग जितनी गर्मी पैदा हो गई थी तब उनकी बेटी ने मल्हार गा कर उन्हें शांत किया था। राग दीपक का शुद्ध रूप अब नहीं देखने को मिलता है। कहते हैं कि अट्ठारह शताब्दि में ही ये राग लुप्त होने लगा था, क्योंकि इसके गाने से गायक के शरीर में अत्यधिक गर्मी पैदा होने लगती थी।

राग दीपक को कभी ठाठ पूर्वी, तो कभी ठाठ बिलावल तो कभी ठाठ खमाज के अंतर्गत गाया बजाया जाता है।

जाति: षाडव संपूर्ण
वादि: सा
संवादी:
गायन समय: रात्रि का दूसरा प्रहर
आरोह- सा ग म प, ध॒ नी सां।
अवरोह- सां ध॒ प, मे ग रे॒ सा।




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