राग - खमाज
परिचय -
इस राग की रचना खमाज थाट से मानी गई है। इसके आरोह में ऋषभ वर्जित है और अवरोह में सातों स्वर प्रयोग किए जाते हैं। इसलिए इसकी जाति षाडव- संपूर्ण है। इसके आरोह में शुद्ध और अवरोह में कोमल निषाद प्रयोग किया जाता है शेष स्वर शुद्ध लगते हैं। वादी स्वर गंधार और संवादी निषाद माना जाता है। गायन समय रात्रि का द्वितीय प्रहर है।
राग विवरण -
आरोह - सा गा मा पा धा नी सां
आवरोह - सां नी_ धा पा मा ग रे सा
पकड़ - नि_धा मा पा ध मा गा पा मा गा रे सा
थाट - खमाज
वर्जित स्वर - रे
जाति - षाडव - सम्पूर्ण
वादी - ग
समवादी - नि
समय - रात्रि का द्वितीय प्रहर
न्यास के स्वर - सा,ग, प
मिलते जुलते राग - यमन कल्याण
कल्याण - ऩि रे ग म` प, ध प म` ग, रे ग, रे, ऩि रे सा
यमन कल्याण - ऩि रे ग म म` प, प म` ग म ग रे, ऩि रे सा
।। इन्सान होना भाग्य की बात है और संगीतकार होना सौभाग्य की बात है।।
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............THE END............
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