राग बिलावल - राग अल्हैया बिलावल परिचय | Raag Bilawal Parichay - संगीत - Shekhar Music Academy
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08 May 2022

राग बिलावल - राग अल्हैया बिलावल परिचय | Raag Bilawal Parichay - संगीत


राग बिलावल - राग अल्हैया बिलावल

परिचय


स्वरआरोह में मध्यम वर्ज्य। निषाद दोनों। शेष शुद्ध स्वर।
जातिषाढव - सम्पूर्ण
थाटबिलावल
वादी/संवादीधैवत/गंधार
समयदिन का प्रथम प्रहर
विश्रांति स्थानसा; ग; प; - सा'; प; ग;
मुख्य अंगग रे ग प; ध नि१ ध प; म ग रे; ग प ध नि सा';

 

आरोह - स, रे, ग, म, प, ध, नि, सं

अवरोह - सं, नि, ध, प, म, ग, रे, स


विशेष:

राग बिलावल में कोमल निषाद के प्रयोग से राग अल्हैया बिलावल का निर्माण हुआ है। इसके अवरोह में निषाद कोमल का प्रयोग अल्प तथा वक्रता से किया जाता है जैसे ध नि१ ध प। यदि सीधे अवरोह लेना हो तो शुद्ध निषाद का प्रयोग होगा जैसे सा' नि ध प म ग रे सा। इसी तरह अवरोह में गंधार भी वक्रता से लेते हैं जैसे - ध नि१ ध प ; ध ग प म ग रे सा। इस राग का वादी स्वर धैवत है परन्तु धैवत पर न्यास नहीं किया जाता। इसके न्यास स्वर पंचम और गंधार हैं। इस राग में धैवत-गंधार संगती महत्वपूर्ण है और इसे मींड में लिया जाता है।

यह उत्तरांग प्रधान राग है, इसका चलन और विस्तार तार सप्तक में अधिकता से किया जाता है। इस राग की प्रकृति में करुण रस का आभास होता है। इस राग में ख्याल, तराने, ध्रुवपद आदि गाये जाते हैं।


अल्हैया बिलावल का निर्माण

राग बिलावल में कोमल निषाद के प्रयोग से राग अल्हैया बिलावल का निर्माण हुआ है। इसके अवरोह में निषाद कोमल का प्रयोग अल्प तथा वक्रता से किया जाता है जैसे ध नि१ ध प। यदि सीधे अवरोह लेना हो तो शुद्ध निषाद का प्रयोग होगा जैसे सा' नि ध प म ग रे सा। इसी तरह अवरोह में गंधार भी वक्रता से लेते हैं जैसे - ध नि१ ध प ; ध ग प म ग रे सा। इस राग का वादी स्वर धैवत है परन्तु धैवत पर न्यास नहीं किया जाता। इसके न्यास स्वर पंचम और गंधार हैं। इस राग में धैवत-गंधार संगती महत्वपूर्ण है और इसे मींड में लिया जाता है।

यह उत्तरांग प्रधान राग है, इसका चलन और विस्तार तार सप्तक में अधिकता से किया जाता है। इस राग की प्रकृति में करुण रस का आभास होता है। इस राग में ख्याल, तराने, ध्रुवपद आदि गाये जाते हैं। यह स्वर संगतियाँ राग अल्हैया बिलावल का रूप दर्शाती हैं -






।। इन्सान होना भाग्य की बात है और संगीतकार होना सौभाग्य की बात है।।
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