Raag Bhopali Details | राग भोपाली परिचय - आरोह, अवरोह, पकड़, आलाप, बंदिश, सरगम गीत | Learn Raag Bhopali for Harmonium - Shekhar Music Academy
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06 October 2020

Raag Bhopali Details | राग भोपाली परिचय - आरोह, अवरोह, पकड़, आलाप, बंदिश, सरगम गीत | Learn Raag Bhopali for Harmonium


राग - भोपाली या भूपाली
स्वर लिपि
स्वर : मध्यम (म), निषाद (नि) वर्ज्य। शेष शुद्ध स्वर।
जाति : औढव - औढव
थाट : कल्याण
वादी : गंधार (ग)
संवादी : धैवत (ध)
समय : रात्रि का प्रथम प्रहर
विश्रांति स्थान : स रे ग प - प ग रे स

आरोह : 
स रे ग प ध सं
अवरोह : सं ध प ग रे स  या  सं ध प ग रे स रे ,ध स 
पकड़ ः पग, रेग, सरे, ध़स

मुख्य अंग : ग रे ग; प ग; ध प; सा' ध प ग; प ग रे ग; ग रे सा; 

विशेष :  यह राग भूप के नाम से भी प्रसिद्ध है। यह पूर्वांग प्रधान राग है। इसका विस्तार तथा चलन अधिकतर मध्य सप्तक के पूर्वांग व मन्द्र सप्तक में किया जाता है। यह चंद्र प्रकाश के समान शांत स्निग्ध वातावरण पैदा करने वाला मधुर राग है। जिसका प्रभाव वातावरण में बहुत ही जल्दी घुल जाता है। रात्रि के रागों में राग भूपाली सौम्य है। शांत रस प्रधान होने के कारण इसके गायन से वातावरण गंभीर व उदात्त बन जाता है। राग भूपाली कल्याण थाट का राग है।

इस राग को गाते समय स्वरों पर न्यास का विशेष ध्यान देना चाहिए। यदि प ध प ; प ध ग प इस तरह से धैवत पर अधिक जोर दिया गया तो राग का स्वरूप बदल जाता है और यह राग देशकार हो जाता है। इसी तरह षडज से धैवत और पंचम से गंधार मींड में लेते समय यदि क्रमशः निषाद और मध्यम स्वरों का स्पर्श होने या कण लगने से भी भूपाली का स्वरूप बदल जाता है और यह राग शुद्ध कल्याण दिखने लगता है। अतः भूपाली को इन रागों से बचाते हुए गाना चाहिए। राग भूपाली में गंधार-धैवत संगती का एक विशेष महत्त्व है और रिषभ न्यास का स्वर है।

इसे कर्नाटक संगीत में राग मोहन कहा जाता है। यह एक पूर्वांग प्रधान राग है और इसे मध्य और मन्द्र सप्तकों में गाया जा सकता है। यह स्वर संगतियाँ राग भूपाली का रूप दर्शाती हैं -

सा ; सा ,ध सा रे ग ; रे ग सा रे ,ध सा ; सा रे ग प ; प ग रे ग ; रे प ग ; ग सा रे ; रे ,ध सा ; ग रे ग ; प ग ; प ध प प ; ध प ; ग प रे ग रे सा ,ध सा ; सा रे ग रे ग प ध सा' ; प ध प सा' ; सा' सा' ; रे' सा' ध सा' ; ध सा' रे' ग' रे' सा' ; ध सा' ध प ग रे ग ; प रे ग रे सा ; रे ,ध सा


नोट ः भूपाली या भोपाली राग के अलंकार अध्याय के लिए हमारे पेज में (Lebel Options) लेबल पर  क्लिक करें।





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