राग - शिवरंजनी
थाट - काफी
स्वर : मध्यम व निषाद वर्ज्य, गंधार कोमल। शेष शुद्ध स्वर।
जाति : औढव - औढव
थाट : काफी
वादी/संवादी : पंचम/षड्ज
समय : मध्य रात्रि
विश्रांति स्थान : प; सा'; - सा'; प;
मुख्य अंग : रे ग१ प ; ध प ग१ रे ; ग१ सा रे ध सा
अवरोह :- सं ध प ग_ रे स
पकड़:- सरेग_प ग_रेसध़ रेस
विशेष - यह बहुत ही मधुर राग है। राग भूपाली में गंधार शुद्ध न लेते हुए गंधार कोमल लगाया जाये तो राग शिवरंजनी हो जाता है। यह स्वर संगतियाँ राग शिवरंजनी का रूप दर्शाती हैं -
सा रे ग१ प ; ध प ग१ रे ; ग१ सा रे ,ध सा ; रे ग१ प ध प ध सा' ; ध सा' ध प ग१ रे ; प ध प ग१ रे ; ग१ रे ग१ सा रे ,ध सा ;
सरगम गीत:
ग_रे सरे सध़ सरे ग_ ग_रे
सरेस
ग_ ग_रे ग_पधसं पसंधप ग_रेसग_
ग_ग_ प संध सं संसं धरेसं
संरेंगं_रेंसंरेंसंध पसंधप ग_रेस
ग_ ग_रे ग_पधसं पसंधप ग_रेसग_
ग_ग_ प संध सं संसं धरेसं
संरेंगं_रेंसंरेंसंध पसंधप ग_रेस
आलाप:
प़ध़सरेग_रे -- सरेग_
प़ध़सरे सध़ प़ध़रे
ग_रेसध़रेस
सरेग_प ग_रेसरे,
ग_पग_पधसं धप ग_
पधपधरेंगं_रेंसंध, रेंसं
प़ध़सरे सध़ प़ध़रे
ग_रेसध़रेस
सरेग_प ग_रेसरे,
ग_पग_पधसं धप ग_
पधपधरेंगं_रेंसंध, रेंसं
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